क्या साहित्य युवा मन की दृष्टि को गढ़ सकता है?
क्या इतिहास को समझने के लिए उसे पहले पढ़ाया जाना आवश्यक है? या उसे कहानियों, पात्रों और मनन के माध्यम से धीरे-धीरे अनुभव भी किया जा सकता है?
वरदराज पेरूमाल कोविल मंदिर, काँचीपुरम, तमिलनाडु

वरदराज पेरूमाल कोविल मंदिर, काँचीपुरम, तमिलनाडु वरदराज पेरूमाल कोविल दिव्य देशम में से एक है, जो विष्णु के वह 108 मंदिर हैं जहाँ 12 आलवार संतों ने तीर्थ करा था और विष्णु स्तुति गायी थीं। यह मंदिर कुछ 1100 वर्ष पुराना है। इसे प्रसिद्ध चोल राजा राज राजा प्रथम ने बनवाया था। बाद के समय […]
विश्वगुरु राष्ट्र के नागरिकों का स्तर

विश्वगुरु राष्ट्र के नागरिकों का स्तर बौद्धिक नागरिक किसी भी देश अथवा राज्य की सर्वाधिक मूल्यवान पूँजी होते हैं। केवल एक बौद्धिक वर्ग (think tank) नहीं, अपितु सभी गणलोग जिन्हें हम ‘साधारण जन’ कहते हैं, उनकी बुद्धि का स्तर, विवेक और संतोष जब ऐसा हो कि वह जीवन दर्शन को जीते हुए निर्भीकता से राजा(सर्वोच्च […]